Event Time .
December 22, 2024
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4:30 pm
रफ़ी साहब
इन्द्रधनुषी विविधता से परिपूर्ण गायिकी
रफ़ी साहब के सौंवे जन्म दिन (24 दिसंबर 2024) को वसुंधरा में हम सबने रविवार 22 दिसंबर 2024 को मनाया। सर्द शाम 4.30 बजे हमारे साथी सदस्य दीपक महान ने रफ़ी साहब के कुछ अद्भुत, सर्वकालिक और इद्रधनुषी विविधता से परिपूर्ण गीत दिखाए जिन्हें देख और श्रवण कर, वसुंधरा सदस्य मंत्रमुग्ध हो गए।
कुछ कलाकार बहुत विशिष्ट होते हैं. उनकी कला की विविधता, आध्यात्मिक गहराई, आलौकिक सौन्दर्य और उससे उत्पन्न आत्मिक सुकून को शब्दों में व्यक्त करना या नापना असंभव होता है. ऐसे ही थे हम सब के प्रिय रफ़ी साहब जो एक असाधारण गायक होने के साथ-साथ, बहुत ही शालीन और सूफी प्रकृति के धनी थे!
रफी साहब के सौंवे जन्मदिन पर वसुंधरा मंच पर दीपक महान, गुरमिंदर सिंह पुरी
दीपक महान
गुरमिंदर सिंह पुरी
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रफी के दीवानों की महफिल
आज शाम ‘वसुंधरा’ में मोहम्मद रफी की जयंती पर उत्सव मनाने के लिए संगीत रसिकों की महफिल सजी जिसमें भाई दीपक महान ने रफी के गाये वे रोमेंटिक मूड के गाने प्रस्तुत किए जो अब कम बजते हैं।
पास बैठो तबीयत बहल जाएगी, मौत भी आ गई हो तो टल जाएगी’ (पुनर्मिलन/1964), तथा ‘तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में शाम कर लूंगा’ (नौनिहाल/ 1967) जैसे गानों से लेकर ‘हमको तो बरबाद किया है’ (गुनाहों का देवता/1967), और ‘दुनिया पागल है और मैं दीवाना’ (शागिर्द/1967) से होते हुए अंत में ‘ऐ मोहब्बत जिंदाबाद’ (मुगले आज़म/1960) पर जाकर बात खत्म हुई।
अधिकांश गानों का चयन 1960 के दशक का था जो वहां मौजूद दर्शक श्रोताओं का किशोर वय का समय था जिनमें उनका अतीत प्रेम उमड़ना स्वाभाविक ही था।
महान साहब और गुरविंदर पुरी साहब ने रफी के दो-दो गानों की लाजवाब प्रस्तुति करके महफिल का रंग शुरू से ही जमा दिया।
– राजेन्द्र बोड़ा