Event Time .
January 12, 2025
.
3:30 pm
Dor
2006 . 1h 50m
वसुंधरा मंच पर रविवार 12 जनवरी शाम 3:30 बजे की फ़िल्म रही ‘डोर’
गुलाबी नगरी की गुलाबी ठंड और गुलाबी शहर की पतंगबाजी से कौन परिचित नहीं!
मकर संक्रांति पर जयपुर का आकाश पूरी तरह पतंग मय हो जाता है लेकिन भला बिना डोर के पतंग उड़ सकती है? इसीलिए हमने पतंगबाजी के माह जनवरी में जिस फिल्म का चयन किया उसका नाम रहा डोर
रविवार 12 जनवरी को वसुंधरा मंच पर हमनें देखी “नागेश कुकुनूर” द्वारा निर्देशित एक अद्भुत फिल्म डोर
दो बिल्कुल अलग समुदाय और प्रदेश की स्त्रियों पर आधारित इस फिल्म में कोई हीरो नहीं है। इसमें असली हीरो है इसकी कहानी, निर्देशन और अभिनय!
ये हौसला कैसे झुके
ये आरज़ू कैसे रुके
मंज़िल मुश्किल तो क्या
धुंदला साहिल तो क्या
तन्हा ये दिल तो क्या
डोर फ़िल्म के एक ख़ूबसूरत गीत की कुछ पंक्तियां पाठकों के लिए …!